Tahalka Today Team
लखनऊ,उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की 07 अगस्त 2026 को प्रस्तावित बैठक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सेव वक्फ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना इफ्तिखार हुसैन इंकलाबी ने महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा सेंट्रल वक्फ काउंसिल को एक विस्तृत शिकायत-पत्र भेजकर बैठक को तत्काल निरस्त अथवा स्थगित करने और किसी भी नीतिगत, प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णय पर रोक लगाने की मांग की है।

शिकायत-पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड का वर्तमान कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है। ऐसे समय में दीर्घकालिक प्रभाव वाले निर्णय लेना संस्थागत मर्यादा, पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 और UMEED पोर्टल का मुद्दा
अभ्यावेदन में कहा गया है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के बाद UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण, अभिलेखों का डिजिटलीकरण और सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक वक्फ संपत्तियों और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए। वक्फ कानून में बोर्ड की संरचना और राज्य सरकार द्वारा सदस्यों की नियुक्ति का भी प्रावधान है।
बोर्ड की वेबसाइट पर पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की वेबसाइट पर निम्न विवरण तत्काल सार्वजनिक किए जाएँ—
- 07 अगस्त की बैठक का नोटिस।
- पूरा एजेंडा।
- बोर्ड के कुल सदस्य।
- वर्तमान सक्रिय सदस्य।
- रिक्त पद।
- पिछली बैठकों की कार्यवाही।
- लागू शासनादेश।
- वित्तीय एवं प्रशासनिक विवरण।
उल्लेखनीय है कि बोर्ड की वेबसाइट पर संगठनात्मक संरचना और कुछ प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध है।
गणपूर्ति (Quorum) और सदस्यता पर उठे सवाल
शिकायत में कहा गया है कि शासन यह स्पष्ट करे कि वर्तमान में बोर्ड में कुल कितने सदस्य वैधानिक रूप से कार्यरत हैं, कितने सक्रिय हैं और प्रस्तावित बैठक के लिए आवश्यक गणपूर्ति उपलब्ध है या नहीं।
साथ ही यदि किसी सदस्य का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, किसी सदस्य ने त्यागपत्र दिया है अथवा कोई सदस्य बैठक में भाग नहीं ले रहा है, तो उसकी स्थिति भी सार्वजनिक की जाए।
शासनादेशों के अनुपालन की जांच की मांग
मौलाना इफ्तिखार हुसैन इंकलाबी ने वर्ष 2006 के शासनादेश का हवाला देते हुए मांग की है कि बैठक की नोटिस जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए और यह देखा जाए कि क्या सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
सेवा-विस्तार और प्रशासनिक निर्णयों पर भी उठाए प्रश्न
शिकायत में कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी के सेवा-विस्तार, नियुक्ति या प्रशासनिक आदेश के संबंध में शासन स्तर पर परीक्षण, शिकायत अथवा जांच लंबित है, तो उससे संबंधित विषयों पर कोई महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
लंबित न्यायिक कार्यवाहियों का भी उल्लेख
अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि यदि बोर्ड के किसी पदाधिकारी या अधिकारी से संबंधित मामले न्यायालय या वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, तो उनकी विधिक स्थिति स्पष्ट होने तक उनसे जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचा जाए।
बैंक खातों और वित्तीय ऑडिट की मांग
सेव वक्फ इंडिया ने बोर्ड और अधीनस्थ वक्फ संस्थाओं के बैंक खातों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं, लेखा परीक्षण और वित्तीय नियंत्रण की स्वतंत्र जांच तथा आवश्यक होने पर विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की है।
रिक्त मुतवल्ली पदों पर विज्ञापन जारी करने की मांग
शिकायत में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में रिक्त मुतवल्ली पदों का सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया जाए, सभी अभ्यर्थियों का निष्पक्ष सत्यापन किया जाए और पारदर्शी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाए।
हर महीने बोर्ड बैठक कराने का सुझाव
सेव वक्फ इंडिया ने यह भी मांग की है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की बैठक प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जाए तथा उसकी कार्यवाही सार्वजनिक की जाए।
सरकार से क्या मांग की गई है?
अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न मांगें की गई हैं—
- 07 अगस्त 2026 की बैठक तत्काल निरस्त अथवा स्थगित की जाए।
- किसी भी नीतिगत, वित्तीय अथवा प्रशासनिक निर्णय पर रोक लगाई जाए।
- वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
- बोर्ड की सदस्यता, गणपूर्ति, वेबसाइट, UMEED पोर्टल अनुपालन और वित्तीय व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- रिक्त मुतवल्ली पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के बाद ही नई बैठक बुलाई जाए।
- यदि किसी विषय पर न्यायिक या प्रशासनिक कार्यवाही लंबित है, तो उसके निष्कर्ष तक संबंधित विषयों पर अंतिम निर्णय न लिया जाए।
सेव वक्फ इंडिया ने अपने अभ्यावेदन के साथ शासनादेश, बैठक की नोटिस, उपलब्ध न्यायालयी दस्तावेज़, UMEED पोर्टल से संबंधित अभिलेख तथा अन्य उपलब्ध दस्तावेज़ भी संलग्न किए जाने की बात कही है।




