तहलका टुडे टीम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता से जुड़े विवाद की फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। न्यायालय ने संबंधित रिकॉर्ड को सीलबंद रखने के साथ अब बोर्ड के दो सदस्यों सैयद शबाहत हुसैन और डॉ. नूरुस हसन नकवी के नमूना हस्ताक्षर लिए जाने के निर्देश दिए हैं।
मामला प्रथम अपील संख्या 93/2025, वक्फ हादी बेगम, हाजरा बेगम, सरदार बेगम बनाम उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड एवं अन्य से संबंधित है। न्यायमूर्ति सैयद क़मर हसन रिज़वी ने 21 सितंबर 2026 को मामले में यह आदेश पारित किया।
18 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुई फॉरेंसिक जांच
हाईकोर्ट ने इससे पहले 18 अगस्त 2026 को वरिष्ठ रजिस्ट्रार को संबंधित रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, महानगर, लखनऊ भेजने का निर्देश दिया था, ताकि संबंधित सदस्यों के हस्ताक्षरों की वैज्ञानिक जांच की जा सके।
वरिष्ठ रजिस्ट्रार ने 18 सितंबर को अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के वैज्ञानिक अधिकारी पंकज कुमार शुक्ला ने 25 अगस्त को न्यायालय के वरिष्ठ रजिस्ट्रार के कक्ष में उपस्थित होकर आदेश में उल्लिखित दस्तावेज प्राप्त किए।
इसके बाद वैज्ञानिक अधिकारी ने 3 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
फॉरेंसिक लैब ने मांगे दोनों सदस्यों के नमूना हस्ताक्षर
लैब की रिपोर्ट में कहा गया कि हस्ताक्षरों की संतोषजनक जांच के लिए सैयद शबाहत हुसैन और डॉ. नूरुस हसन नकवी के नमूना हस्ताक्षर आवश्यक हैं, जो उस समय उपलब्ध नहीं थे।
लैब ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि 4 नवंबर 2024 को बोर्ड की बैठक के दौरान किए गए हस्ताक्षरों तथा रजिस्टर के अन्य पन्नों पर मौजूद हस्ताक्षरों को “स्वीकृत नमूना हस्ताक्षर” माना जा सकता है या नहीं।
इसके साथ ही वैज्ञानिक अधिकारी ने दोनों संबंधित सदस्यों को न्यायालय के प्रतिष्ठान में बुलाकर उनके नमूना हस्ताक्षर लिए जाने का सुझाव दिया है।
6-6 पन्नों पर होंगे नमूना हस्ताक्षर
फॉरेंसिक जांच के लिए दोनों सदस्यों से विवादित प्रकार के हस्ताक्षर सामान्य गति से करवाए जाएंगे।
प्रत्येक सदस्य से 6 पन्नों पर 15 से 20 हस्ताक्षर प्रति पृष्ठ कराने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
इसके अलावा विवादित हस्ताक्षरों के समय के आसपास के ऐसे मूल दस्तावेज भी मांगे गए हैं, जिन पर संबंधित सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हों।
नमूना हस्ताक्षरों और संबंधित मूल दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा जाएगा।
बोर्ड को दोनों सदस्यों की मौजूदगी सुनिश्चित कराने के निर्देश
हाईकोर्ट ने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वह उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट की जानकारी दें और संबंधित दोनों सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।
वरिष्ठ रजिस्ट्रार को सैयद शबाहत हुसैन और डॉ. नूरुस हसन नकवी की उपस्थिति के लिए तारीख और समय तय करना होगा तथा इसकी रिपोर्ट अगली सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष पेश करनी होगी।
अभी अदालत ने हस्ताक्षरों को फर्जी नहीं माना
मामले में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट के 21 सितंबर के आदेश में यह निष्कर्ष नहीं दिया गया है कि संबंधित हस्ताक्षर फर्जी हैं।
अदालत ने हस्ताक्षरों की वास्तविकता निर्धारित करने के लिए फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अंतिम स्थिति वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
रिकॉर्ड रहेगा सीलबंद, अंतरिम आदेश भी जारी
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि पहले से सीलबंद रिकॉर्ड वरिष्ठ रजिस्ट्रार की अभिरक्षा में सुरक्षित रहेगा।
साथ ही 18 अगस्त 2026 को दिया गया अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।
28 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले को 28 अक्टूबर 2026 को शीर्ष 20 मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
अब अगली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि दोनों सदस्यों के नमूना हस्ताक्षर लिए गए या नहीं, आवश्यक मूल दस्तावेज उपलब्ध हुए या नहीं और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया किस स्थिति तक पहुंची।
फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी में हस्ताक्षरों की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया जारी है और मामले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 28 अक्टूबर की सुनवाई होगी।




