सरकार के बड़े-बड़े दावों और PIB के प्रेस नोटों के बीच— छड़ी और बैरिस्टर की वॉक–पट्टता ने किरण रिजिजू को भी ठहरने पर मजबूर किया, उम्मीद पोर्टल की खामियों पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक ने मचा दिया तूफ़ान

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नई दिल्ली / 11 दिसंबर 2025/सैयद अली मुस्तफा

सरकार की ओर से जारी हो रहे बड़े-बड़े दावों, PIB के लगातार प्रेस नोटों और उम्मीद पोर्टल को लेकर बने ‘कार्य पूरा होने’ के सरकारी नैरेटिव के बीच—आज का नज़ारा बिल्कुल अलग था।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का प्रतिनिधि मंडल जैसे ही अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू से मिलने पहुँचा, मंत्रालय का माहौल अचानक ही बदल गया।

सबसे पहला ध्यान किसने खींचा?

ना सरकारी पावर-पॉइंट प्रेजेंटेशन…
और ना ही मंत्रालय की चकाचौंध—

बल्कि छड़ी के सहारे चलता हुआ एक सादा, धैर्यवान और दृढ़ व्यक्तित्व—
सैयद सादतुल्लाह हुसैनी।

और दूसरी ओर
बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की शांत लेकिन प्रखर वॉक–पट्टता,
जिसमें आत्मविश्वास और तर्क की ताकत साफ झलक रही थी।

दोनों के प्रवेश से
किरण रिजिजू भी कुछ क्षणों के लिए ठहर गए—
मानो समझ गए हों कि आज की मुलाक़ात सिर्फ औपचारिकता नहीं,
बल्कि बेहद गंभीर मुद्दे की पड़ताल है।

गलियारों में फुसफुसाहट फैल गई—
“PIB की भाषा अपने स्थान पर…
लेकिन असल ज़मीन की हकीकत आज सामने आने वाली है।”

उम्मीद पोर्टल—सरकारी वादों की चमक, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त उदास

प्रतिनिधियों ने मंत्री को बताया कि:

  • पोर्टल आधा-अधूरा तैयार था,
  • तकनीकी खामियाँ लगातार थीं,
  • डेटा अपलोड करते समय सर्वर बार-बार रुक जाता था,
  • लाखों वक्फ संपत्तियाँ अपलोड ही नहीं हो सकीं।

यानी, सरकार के दावे—एक तरफ

और हकीकत बिल्कुल दूसरी तरफ।

6 महीने की समय सीमा—व्यवहारिक नहीं, बल्कि समुदाय पर दबाव

बोर्ड ने स्पष्ट कहा—

  • नियम 03 जुलाई 2025 को लागू हुए,
  • लेकिन पोर्टल उससे पहले 06 जून को ही चालू कर दिया गया।

यह एक ऐसी जल्दबाज़ी थी, जिसने पूरे देश के मुतवल्लियों, वक्फ बोर्डों और संस्थाओं को अव्यवस्थित कर दिया।

चार राज्य—पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान उत्तरप्रदेश  पहले ही समय बढ़ाने अदालत जा चुके हैं।

तेज़–तर्रार बैरिस्टर के तर्क और हुसैनी साहब की छड़ी की दृढ़ता—एक ही दिशा में इशारा

मुलाक़ात के दौरान

  • बैरिस्टर ओवैसी के तर्क,
  • हुसैनी साहब की धैर्यपूर्ण उपस्थित,
  • और अन्य सदस्यों की स्पष्ट मांगें

ने यह साबित कर दिया कि यह मुद्दा सिर्फ कागज़ी प्रक्रिया का नहीं,
बल्कि राष्ट्रीय स्तर की संपत्तियों के संरक्षण का मामला है।

मंत्री रिजिजू ने सुनी पूरी बात—और आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया

मंत्री महोदय ने गंभीरता से पूरी चर्चा सुनी और कहा कि
सरकार इस समस्या के समाधान के लिए
जरूरी कदम जल्द ही उठाएगी।

प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख नाम:

  • सैयद सादतुल्लाह हुसैनी — (छड़ी के साथ उपस्थिति बनी खास चर्चा)
  • बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी — (अपनी विशिष्ट वॉक–पट्टता से सबका ध्यान खींचा)
  • मौलाना फ़ज़लुर्रहमान मुजद्द्दी — महासचिव
  • मोहम्मद अदीब — पूर्व सांसद
  • मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी — महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिंद
  • अन्य अधिवक्ता व सदस्य

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