तहलका टुडे | लखनऊ/अमरोहा
उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड से जुड़े एक मामले ने अब मुख्यमंत्री आवास तक दस्तक दे दी है। अमरोहा के पवित्र इमामबाड़ा “वक्फ बतूल दौलत आई 1285” की संपत्ति को लेकर की गई शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रकरण को शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) जीशान रिजवी के समक्ष भेजते हुए परीक्षण कर उचित कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की है।
तहलका टुडे के पास उपलब्ध शिकायत पत्र पर 21 सितंबर 2026 की प्राप्ति/प्रेषण संबंधी मुहर दिखाई दे रही है। पत्र में शिकायतकर्ता ने संपत्ति के कथित अवैध क्रय-विक्रय, हिबानामा/गिफ्ट डीड और मुतवल्ली नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
केंद्रीय वक्फ परिषद की उपलब्ध सरकारी सूची में भी अली जैदी को उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ का अध्यक्ष और जीशान रिजवी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता आमिर रजा पुत्र जाफर रजा, निवासी अमरोहा, वर्तमान निवासी चौक, लखनऊ ने मुख्यमंत्री कार्यालय को दिए पत्र में दावा किया है कि अमरोहा स्थित पवित्र इमामबाड़े की संपत्ति को कथित अवैध खरीद-बिक्री और हस्तांतरण से बचाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री आवास पर पहले भी शिकायतें की थीं।
पत्र में दो पुराने आवेदनों का उल्लेख है—
24 सितंबर 2024 — संदर्भ संख्या 15157240171573
30 जुलाई 2026 — संदर्भ संख्या 15157260142492
शिकायतकर्ता का कहना है कि दोनों आवेदनों के साथ संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए थे।
1988 की रजिस्ट्री ने उठाए बड़े सवाल
शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू संपत्ति से संबंधित वर्ष 1988 की रजिस्ट्री और उसके बाद किए गए कथित हस्तांतरण से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास वर्ष 1988 की मूल रजिस्ट्री की प्रति है, जिसे उन्होंने शिकायत के साथ प्रस्तुत किया। इसके अलावा कथित हिबानामा/गिफ्ट डीड के दस्तावेज भी लगाए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धार्मिक संपत्ति को अब्बास हुसैन द्वारा खरीदे जाने के बाद कथित रूप से हसन अब्बास और ताजदार हुसैन के पक्ष में हस्तांतरित किया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। दस्तावेजों की वास्तविकता और संपत्ति के कानूनी स्वामित्व का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी/न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।
मुख्यमंत्री आवास से भेजे गए निर्देशों पर बरती जा रही लापरवाही पर सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री आवास से पूर्व में मामला भेजे जाने के बावजूद संबंधित स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उनका दावा है कि न तो उनसे समुचित संपर्क किया गया और न ही विवादित संपत्ति का मौके पर सत्यापन कराया गया।
इसी आधार पर शिकायत में चेयरमैन अली जैदी तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है।
यह आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और जांच में इनके सत्यापन की आवश्यकता है।
मुतवल्ली नियुक्ति पर भी विवाद
मामले में तकी रजा के मुतवल्ली पद के लिए आवेदन किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब संपत्ति के स्वामित्व और कथित हस्तांतरण को लेकर विवाद मौजूद है, तो मुतवल्ली नियुक्ति पर अंतिम निर्णय से पहले पुराने रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, वक्फ रिकॉर्ड और कथित हस्तांतरण दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
इसी आधार पर उन्होंने तकी रजा के मुतवल्ली आवेदन पर निर्णय रोकने और विवादित संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
FIR और CB-CID जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61 समेत विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कथित आपराधिक षड्यंत्र और अन्य अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
साथ ही मामले की जांच—
◆ मुख्यमंत्री सचिवालय की विशेष विंग
◆ अथवा CB-CID
से कराने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने नामित व्यक्तियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के बाद, आरोप प्रमाणित होने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अली जैदी के कार्यकाल को लेकर भी बढ़ी चर्चा
अली जैदी लंबे समय से उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में दर्ज हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद की 22 मार्च 2026 को अपडेट की गई सूची में उनका नाम अध्यक्ष और जीशान रिजवी का नाम CEO के रूप में दर्ज है।
वहीं, 21 अक्टूबर 2026 को मौजूदा बोर्ड के कार्यकाल की अवधि पूरी होने का दावा शिकायत/स्थानीय चर्चाओं में किया जा रहा है। इस तारीख की कानूनी स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं हुई है, इसलिए इसे दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत पर कार्रवाई के लिए मामला CEO के पास भेजे जाने को लेकर बोर्ड के भीतर और वक्फ से जुड़े लोगों के बीच चर्चा तेज होना स्वाभाविक है।
जीशान रिजवी के सामने अब बड़ी जिम्मेदारी
जीशान रिजवी की भूमिका इस मामले में इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजे गए पत्र में उन्हीं से प्रकरण का परीक्षण कर उचित कार्रवाई की अपेक्षा की गई है।
वक्फ मामलों में जीशान रिजवी की भूमिका पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आती रही है। 2025 में उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के विवरण से जुड़े काम के संबंध में उनके बयान भी प्रकाशित हुए थे।
अब इस मामले में देखना होगा कि—
क्या 1988 की रजिस्ट्री की जांच होगी?
क्या कथित हिबानामा/गिफ्ट डीड के दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा?
क्या मौके पर संपत्ति का निरीक्षण होगा?
क्या वक्फ रिकॉर्ड और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कराया जाएगा?
क्या मुतवल्ली नियुक्ति पर कोई निर्णय जांच पूरी होने तक रोका जाएगा?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या मुख्यमंत्री कार्यालय को जांच की कार्रवाई/रिपोर्ट से अवगत कराया जाएगा?
दस्तावेज सामने आए, अब कार्रवाई का इंतजार
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज मुख्यमंत्री आवास से संबंधित पत्र है, जिसमें प्रकरण को शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के CEO के स्तर पर परीक्षण और उचित कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
दूसरी ओर, शिकायत में लगाए गए संपत्ति संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए अब आगे होने वाली सरकारी जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब से ही तस्वीर स्पष्ट होगी।
अमरोहा का पवित्र इमामबाड़ा, 1988 की रजिस्ट्री, कथित हिबानामा और मुतवल्ली नियुक्ति—इन सभी बिंदुओं पर अब जांच की दिशा क्या होती है, इस पर वक्फ से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है।




