🕋 नजफ़-अशरफ़ | 3 अगस्त 2025 | 8 सफर 1447 हिजरी
चेहलुम का मुक़द्दस अय्याम है। दुनिया भर से करोड़ों अज़ादार, इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़ियारत के लिए पैदल चलकर कर्बला पहुंचने की तैयारी में हैं। हर क़दम इख़लास, हर आंसू तौबा और हर सांस इबादत बन जाती है इस सफर में। लेकिन इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिस पर खुद मरजए आज़म, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी साहब (दाम ज़िल्लुहु) के कार्यालय से एक साफ, सादा लेकिन बेहद गहरा पैग़ाम जारी किया गया है।
❌ तस्वीरें लगाना इजाज़त के खिलाफ़ है
बयान में यह स्पष्ट कहा गया है कि:
“कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठन सीस्तानी साहब की तस्वीरों को बैनरों, पोस्टरों और होर्डिंग्स पर छापकर सार्वजनिक स्थानों, खासकर कर्बला जाने वाले रास्तों पर लगा रहे हैं।”
यह न सिर्फ़ अनुचित है बल्कि सीस्तानी साहब की मर्ज़ी और विचारों के खिलाफ़ भी है।
बयान में दो टूक कहा गया:
“ये अमल हमारी मर्ज़ी के खिलाफ़ है। हमने न कभी इसकी इजाज़त दी और न ही इसको पसंद किया। हम चाहते हैं कि लोग इस तरह की हरकतों से परहेज़ करें।” को
📢 मोहब्बत दिखाइए, मगर अंदाज़ सही रखिए
सीस्तानी साहब की यह बात नसीहत है उन तमाम अकीदतमंदों के लिए जो मोहब्बत में हदें पार कर जाते हैं।
शायद तस्वीर लगाना उन्हें अपनी मुहब्बत का इज़हार लगता हो, लेकिन मरजए आज़म का पैग़ाम साफ़ है —
इमाम हुसैन (अ.स.) की राह में दिखावे नहीं, अख़लाक, तौज़ी और फ़िक्र चाहिए।
🛑 इख़लास को प्रचार में न बदलें
यह सफर इख़लास और कुर्बानी का है। इस राह में किसी शख्स की तस्वीर नहीं, बल्कि उसकी शिक्षा, सादगी और सेवा का असर बोलना चाहिए।
सीस्तानी साहब की खामोशी भी उम्मत की तर्बियत है — और जब वो बोलें, तो हर लफ़्ज़ में हिदायत होती है।
⚖️ जिम्मेदार संस्थाओं से अपील
बयान के आखिर में संबंधित सरकारी और धार्मिक संस्थाओं से भी गुज़ारिश की गई है कि इस तरह के मामलों में ज़रूरी क़दम उठाए जाएं, ताकि ये गलत चलन रुक सके और रास्ता सिर्फ़ इमाम हुसैन (अ.स.) की याद और पैग़ाम से रौशन रहे — न कि इंसानी तस्वीरों से।
🕊️ खुला पैग़ाम उम्मत के नाम
जो लोग सैयद सीस्तानी साहब से मोहब्बत करते हैं, उन्हें चाहिए कि उनकी तस्वीर नहीं, उनकी तालीम और उसूल को फैलाएं।
ये वक्त है समझदारी का —
पैग़ाम को याद रखिए, चेहरा नहीं। उसूलों को ज़िंदा रखिए, नारों को नहीं।
📜 जारी करने वाला:
मकतब-ए-आयतुल्लाह सैयद अली सीस्तानी (दाम ज़िल्लुहु)
नजफ़-अशरफ़
तारीख: 3 अगस्त 2025 / 8 सफर 1447 हिजरी