तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक
बाराबंकी, 23 अप्रैल —यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बाराबंकी की मिट्टी से उठती हुई वह आवाज़ है, जो अब दबने को तैयार नहीं। यह आवाज़ है उन लाखों लोगों की, जिन्होंने अपने भरोसे और संघर्ष से समाजवादी पार्टी को यहां मजबूती दी—लेकिन आज वही लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
जनपद की सियासत में एक नाम वर्षों से विश्वास, संघर्ष और जनसेवा का प्रतीक रहा है—अरविंद सिंह गोप। छात्र राजनीति से निकले इस जमीनी नेता ने न सिर्फ हैदरगढ़ और रामनगर से विधायक बनकर अपनी काबिलियत साबित की, बल्कि बाराबंकी की 6 विधानसभा सीटों को सपा की झोली में डालने में अहम भूमिका निभाई।
🧭 “इतना सब कुछ देने के बाद भी क्यों उपेक्षा?”
बाराबंकी की आवाम आज एक ही सवाल पूछ रही है—
जिस नेता ने पार्टी को जनपद में मजबूत किया, उसे न विधान परिषद भेजा गया, न राज्यसभा।
क्या जमीनी संघर्ष की कोई कीमत नहीं?
क्या अब राजनीति सिर्फ रसूख और संसाधनों के इर्द-गिर्द सिमट गई है?
दो कार्यकाल से सदन से बाहर रहने के बावजूद, अरविंद सिंह गोप का जनसंपर्क और प्रभाव आज भी वैसा ही है। सुबह से उनके दरवाजे पर गरीबों की कतारें लगती हैं—जहां सुनवाई भी होती है और समाधान भी।
⚖️ “स्थानीय बनाम बाहरी—नौजवानों में बढ़ती बेचैनी”
स्नातक चुनाव को लेकर पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह को लेकर भी चर्चा तेज है। इनके पति एसपी सिंह प्रतापगढ से सांसद है, दोनों लखनऊ बाराबंकी के लखनऊ पब्लिक स्कूल के मालिकान है, राजनीति स्टेटस सिंबल है सेवा भाव नहीं है,युवाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्थानीय और संघर्षशील चेहरों को दरकिनार कर दिया गया है?
📣 “अखिलेश यादव से भावुक अपील”
अब बाराबंकी की जनता और स्नातक नौजवान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से सीधे गुहार लगा रहे हैं—
“नेताजी, बाराबंकी ने हमेशा पार्टी को ताकत दी है।
अब वक्त है कि इस जमीन से जुड़े सच्चे सिपाही को उसका हक दिया जाए।
जो नेता हर दिन जनता के बीच रहता है, उसे ही आगे बढ़ाया जाए।”
🏛️ “बैठकों से आगे बढ़कर फैसले की जरूरत”
सिविल लाइंस स्थित आवास पर जिला अध्यक्ष हाफिज अयाज़ अहमद की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्नातक चुनाव में मतदाता बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनी। लेकिन जनता अब सिर्फ बैठकों से संतुष्ट नहीं
उसे फैसले चाहिए, और वो भी न्यायपूर्ण।
❤️ “बाराबंकी की पुकार”
यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि दिल से निकली एक सच्ची मांग है—
“जिसने हमें संभाला, आज हम उसके साथ खड़े हैं…
अब पार्टी भी उसके साथ खड़ी हो।”
बाराबंकी की आवाम आज एकजुट होकर कह रही है—
“जमीनी कद्दावर नेता अरविंद सिंह गोप को उनका हक मिलना ही चाहिए।”
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