“फूस की छत से सपनों की ऊंची उड़ान: वैज्ञानिक बेटी पूजा पाल के आंसुओं को मिला समाजवादी हमदर्द अरविंद सिंह गोप का स्नेहिल तोहफा — कंप्यूटर और साइकिल से नवाजी गई संघर्ष की मिसाल; भावुक पूजा लिपट कर रो पड़ी, जबकि सत्ता पक्ष के सांसद, मंत्री और एमएलसी की चुप्पी बनी जनचर्चा

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रिपोर्ट /सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक


जहां उम्मीदें दम तोड़ देती हैं, वहां पूजा पाल जैसी बेटियां उम्मीद को नया नाम देती हैं।

बाराबंकी के दरियाबाद विधानसभा के छोटे से गांव डलाई का पुरवा (मजरा अगेहरा बिरौली) की होनहार बेटी पूजा पाल ने साबित कर दिया कि असली ताक़त न धन होती है, न संसाधन—बल्कि हौसला होता है, मेहनत होती है और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून होता है।

इंटर की छात्रा पूजा ने अपने घर के आंगन में मेहनत से एक ऐसा थ्रेसर तैयार किया, जिससे गांव के किसान भूसे और धूल की मुसीबतों से छुटकारा पा सकेंगे। यह एक वैज्ञानिक सोच की उपज है, जो एक फूस के घर में पनपी है।


गर्व के इस क्षण में समाजवादी पार्टी के अरविंद  सिंह गोप  बने अभिभावक से भी बढ़कर साथी

इस प्रेरणादायक क्षण को यादगार बना दिया समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री श अरविंद कुमार सिंह गोप जी ने, जब वे खुद पूजा पाल के जर्जर फूस के घर पहुंचे। उनके साथ युवा समाजवादी नेता अविरल कुमार सिंह भी थे।

गांव के इस साधारण परिवार को जब गोप जी का स्नेह और सादगी से भरा हाथ मिला, तो न सिर्फ पूजा का हौसला बढ़ा, बल्कि पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

गोप भैया ने पूजा को ससम्मान भेंट किया:

  • एक लैपटॉप, जिससे उसकी तकनीकी शिक्षा को रफ्तार मिले।
  • एक साइकिल, जिससे स्कूल तक का रास्ता आसान हो।
  • अंगवस्त्र व गुलदस्ता, जिससे यह संदेश जाए कि संघर्ष की बेटी आज समाज की शान बन गई है।

🗣️ गोप जी ने कहा:
पूजा जैसी बेटियां हमारी पार्टी की प्राथमिकता हैं। हम समाजवादी हैं—हमारा सपना है कि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे। अखिलेश यादव जी का स्पष्ट संदेश है—हर होनहार को सम्मान दो, संबल दो, सपोर्ट दो।
पूजा, अब तुम्हारी पढ़ाई, तुम्हारे सपने, तुम्हारी ज़िंदगी में कोई रुकावट नहीं आएगी। मैं खुद तुम्हारा अभिभावक हूं। तुम जिस कॉलेज में पढ़ना चाहो, जिस शहर में जाना चाहो—तुम्हारी राह में कोई बाधा नहीं होगी।


🏡 पक्का मकान और पानी की व्यवस्था का भी ऐलान

गोप जी ने यह भी कहा कि पूजा के घर की हालत किसी को भी भावुक कर सकती है।

फूस की यह छत अब नहीं चलेगी। मैं खुद इसे पक्का मकान दिलवाऊंगा। साथ ही पानी की दिक्कत को भी जल्द खत्म कराया जाएगा।

यह केवल एक वादा नहीं, एक राजनीतिक नहीं, मानवीय प्रतिबद्धता है।


🌾 एक थ्रेसर, एक बेटी, और एक बदलाव की बयार

पूजा का थ्रेसर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि गांव की सोच में क्रांति है। पूजा ने किसानों के लिए वैज्ञानिक समाधान खोजा और आज वह मिसाल बन गई है उन लाखों बेटियों के लिए जो गरीबी की चादर में लिपटे सपनों को सच करने की जद्दोजहद में लगी हैं।


👥 मौजूद रहे कई जनप्रतिनिधि व समाजसेवी

इस ऐतिहासिक और भावनात्मक पल में शामिल हुए:
पूर्व विधायक राम गोपाल रावत, युवा नेता अविरल कुमार सिंह, हशमत अली गुड्डू, ब्लॉक अध्यक्ष शिव कुमार यादव, मोहम्मद गुलजार रज़ा, विकास सिंह, सानू सिंह राठौर, हृदय यादव, और सैकड़ों ग्रामीण।


💬 “गांव की यह बेटी अब पूरे प्रदेश की पहचान है”

गोप जी की यह पहल केवल पूजा को नहीं, बल्कि हजारों बेटियों को यह भरोसा देती है कि यदि वे संघर्ष करें, तो समाजवादी सोच उनके साथ खड़ी है।


🌹 “जिस देश की बेटियां सोचने लगती हैं, वहां विकास रुक नहीं सकता।”
– अरविंद कुमार सिंह गोप

🤐 लेकिन… सत्ता पक्ष की चुप्पी?

जहां एक तरफ एक विपक्षी नेता बेटी के घर जाकर उसकी पीड़ा समझ रहा था, वहीं सत्तारूढ़ दल के सांसद, मंत्री और एमएलसी की चुप्पी ने गांववालों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
पूजा का गांव और संघर्ष कोई छुपी बात नहीं, फिर भी स्थानीय सांसद, मंत्री और एमएलसी की ओर से कोई सहायता, कोई बयान तक नहीं आया। यह खामोशी अब गांव और सोशल मीडिया की ‘सबसे बड़ी चर्चा’ बन चुकी है।

 “जब चमकते कैमरे नहीं थे, तब गोप जी बेटी की झोंपड़ी में पहुंचे। और जो सत्ता में हैं, उन्होंने चुप्पी साध ली। क्या यही है ‘सबका साथ, सबका विकास’?” — स्थानीय ग्रामीण

 

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