तहलका टुडे/सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
नई दिल्ली। भारतीय कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (R-Infra) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹54.82 करोड़ मूल्य की परिसंपत्तियाँ जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999, धारा 37A के तहत की गई है।
यह मामला अब सिर्फ कॉर्पोरेट वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाला रैकेट और सार्वजनिक धन की हेराफेरी का रूप ले चुका है।
🔥 ED की जांच में क्या मिला? सबसे बड़े खुलासे
NHAI की परियोजनाओं के लिए दी गई राशि को फर्जी कंपनियों में डायवर्ट किया गया
ED ने पाया कि रिलायंस इंफ्रा ने:
- सार्वजनिक धन (public fund) को
- फर्जी शेल कंपनियों में घुमाया,
- और प्रोजेक्ट खर्च दिखाकर हेराफेरी की।
पैसा फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से लेयर होकर UAE भेजा गया
ED ने यह भी उजागर किया कि:
- कंपनियों ने हवाला ऑपरेटरों के नेटवर्क के माध्यम से
- पैसा अमीरात (यूएई) में भेजा,
- बिना किसी वैध सामान या सेवा के आदान–प्रदान के।
600 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय हवाला खुलासा
जिन फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल हुआ:
- वे ₹600 करोड़ से अधिक के हवाला लेन-देन में शामिल पाई गईं।
- इनके बैंक खातों से समूह कंपनियों और हवाला ऑपरेटरों के लिंक मिले।
परियोजनाओं पर गंभीर असर – बैंक लोन NPA बने
फंड डायवर्जन के कारण:
- परियोजनाएँ वित्तीय संकट में आ गईं,
- बैंक के ऋण NPA में बदल गए,
- और सार्वजनिक वित्तीय प्रणाली को नुकसान हुआ।
ED ने 13 बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से जब्त किया
FEMA के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए:
- ED ने 13 बैंक खाते सील किए,
- जिनमें जमा राशि ₹54.82 करोड़ थी।
🔥 यह कार्रवाई क्यों बड़ी मानी जा रही है?
✔ कंपनी अनिल अंबानी ग्रुप की
✔ सार्वजनिक निधि में अनियमितता
✔ फर्जी कंपनियों के जरिए लेयरिंग
✔ अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क से कनेक्शन
✔ 600 करोड़ से अधिक के लेन–देन
✔ FEMA धारा 37A के तहत सख्त कार्रवाई
यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी वित्तीय जांचों में से एक माना जा रहा है।





