“इंतज़ार के मतवाले”जब दुआ ज़िम्मेदारी बन जाए और क़ौम की तामीर शुरू हो, WIN चैनल और इमरान रसूल की वह ख़ामोश कोशिश, जो इमाम-ए-ज़माना (अ.फ़.) के इंतज़ार को अमल में ढाल रही है

When Waiting Becomes Responsibility.

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तहलका टुडे स्पेशल स्टोरी

दुनिया कभी इतनी तेज़ नहीं थी। सूचनाएँ बहुत हैं, मगर सच्चाई की समझ कम होती जा रही है। आवाज़ें बुलंद हैं, मगर ज़मीर की आवाज़ दबती जा रही है। हर तरफ़ रोशनी है, लेकिन दिलों में हिदायत की लौ मंद पड़ती जा रही है।

ऐसे दौर में, जब ज़ुल्म को तर्क और ग़लत को चलन बना दिया गया है, इंसानियत एक ऐसे रहनुमा की तलाश में है जो सिर्फ़ हुकूमत न करे, बल्कि इंसाफ़ क़ायम करे

यही वह घड़ी है जहाँ इमाम ज़माना हज़रत हुज्जत इब्ने हसन अल-अस्करी (अ.फ़.) का इंतज़ार सिर्फ़ एक अक़ीदा नहीं रहता, बल्कि एक ज़िम्मेदारी बन जाता है।

और इसी ज़िम्मेदारी को समझाने, जगाने और ज़िंदा रखने की एक ख़ामोश लेकिन असरदार कोशिश का नाम है— WIN चैनल, जिसके पीछे एक मिशनरी सोच है— इमरान रसूल

इंतज़ार: आँखों से नहीं, किरदार से

इमाम ज़माना (अ.फ़.) का इंतज़ार सिर्फ़ यह कहना नहीं है कि “या इमाम, आप आइए”

बल्कि यह पूछना भी है कि “जब आप आएँगे, क्या हम आपके साथ खड़े होने लायक होंगे?”

इंतज़ार का मतलब हाथ पर हाथ रखकर बैठना नहीं, बल्कि अपने आप को हक़ के लिए तैयार करना है।

  • क्या हमारी ज़िंदगी कुरान के मुताबिक़ है?
  • क्या हमारी मोहब्बत अहलेबैत (अ.स.) जैसी बे-शर्त है?
  • क्या हम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़े होने का हौसला रखते हैं?

WIN चैनल इसी इंतज़ार को भावना से निकालकर अमल में बदलने की कोशिश करता है।

इमरान रसूल: इंतज़ार को मिशन बनाने वाला नाम

इमरान रसूल उन लोगों में से नहीं जो दीन को सिर्फ़ तक़रीरों या मजलिसों तक सीमित समझें। उनकी सोच सीधी और साफ़ है—

अगर इमाम ज़माना (अ.फ़.) इंसाफ़ की बुनियाद पर ज़हूर करेंगे, तो उनके नासिर भी इंसाफ़ पर चलने वाले होने चाहिए।

यही सोच उन्हें उस मीडिया प्लेटफॉर्म तक लाई जहाँ से कुरान की तालीम, अहलेबैत की सीरत और इंतज़ार की ज़िम्मेदारी दुनिया के कोने-कोने तक पहुँच सके।

WIN चैनल: कब और कैसे शुरू हुआ

WIN चैनल की शुरुआत नवंबर 2012 में हुई, जब भारत सरकार ने इसे 24 घंटे के इस्लामिक सैटेलाइट चैनल के रूप में अपलिंक और डाउनलिंक का आधिकारिक लाइसेंस प्रदान किया।

यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं थी। यह भारत का पहला ऐसा इस्लामिक चैनल था जिसे सरकारी मान्यता के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारण की अनुमति मिली।

इमरान रसूल के लिए यह सिर्फ़ एक चैनल नहीं था— यह एक अमानत थी, जिसका जवाब उन्हें अल्लाह, अहलेबैत (अ.स.) और आने वाली नस्लों को देना था।

क्यों ज़रूरी था WIN चैनल

WIN चैनल इसलिए ज़रूरी था क्योंकि—

  • इस्लाम को सियासी शोर से अलग करके समझाने की ज़रूरत थी
  • अहलेबैत (अ.स.) की मोहब्बत को रस्म नहीं, उसूल बनाने की ज़रूरत थी
  • और सबसे अहम— इमाम ज़माना (अ.फ़.) के इंतज़ार को सही मायनों में पेश करने की ज़रूरत थी

यह चैनल बताता है कि इंतज़ार का मतलब डर या मायूसी नहीं, बल्कि उम्मीद और तैयारी है।

WIN चैनल की रूह: कुरान और अहलेबैत

WIN चैनल के प्रोग्राम्स चीखते नहीं, डराते नहीं, और नफ़रत नहीं फैलाते।

वे सिखाते हैं—

  • कुरान को पढ़ने के साथ-साथ समझना
  • अहलेबैत (अ.स.) की सीरत को ज़िंदगी में उतारना
  • और अपने किरदार को ऐसा बनाना कि वह इमाम के ज़हूर की राह में रुकावट न बने

यही वजह है कि WIN चैनल का असर दिलों तक जाता है।

इमाम के नासिर: सिर्फ़ नाम नहीं, किरदार

WIN चैनल बार-बार यह सवाल उठाता है—

अगर आज इमाम ज़माना (अ.फ़.) ज़हूर फ़रमा दें, तो क्या हम उनके नासिर बन पाएँगे?

नासिर बनने के लिए—

  • सच्चाई से समझौता नहीं
  • ज़ुल्म के सामने ख़ामोशी नहीं
  • और दुआ के साथ-साथ अमल ज़रूरी है

WIN चैनल यही तालीम देता है कि इंतज़ार सुधार से शुरू होता है— ख़ुद से, अपने घर से, और अपने समाज से।

दुनिया भर तक पहुँचता पैग़ाम

आज WIN चैनल INSAT-4A और GSAT-30 सैटेलाइट के ज़रिए करीब 30 से अधिक देशों में देखा जा रहा है।

फार ईस्ट से लेकर मिडिल ईस्ट, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका तक

इमाम ज़माना (अ.फ़.) के इंतज़ार का यह पैग़ाम घर-घर पहुँच रहा है।

यह कारोबार नहीं, नीयत की बरकत है।

दुआ और अमल के बीच की दूरी

इमरान रसूल की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि दुआ और अमल के बीच की दूरी खत्म हो

वह चाहते हैं कि जब कोई कहे— “अल्लाहुम्मा अज्जिल वलिय्यक अल-फराज” तो उसकी ज़िंदगी भी उस दुआ की गवाही दे।

WIN चैनल इसी गवाही का मंच है।

आज का सवाल, आने वाला जवाब

इमाम ज़माना (अ.फ़.) का इंतज़ार आख़िरी ज़माने की कहानी नहीं— यह आज की ज़िम्मेदारी है।

यह इंतज़ार पूछता है—

  • हम किसके साथ खड़े हैं?
  • हम किसके ख़िलाफ़ ख़ामोश हैं?
  • और हम किस किरदार के साथ ज़हूर की सुबह का स्वागत करना चाहते हैं?

जो लोग इस इंतज़ार को सही समझाते हैं, उम्मत को तैयार करते हैं, और नासिर बनने का रास्ता दिखाते हैं—

वही ज़हूर की सुबह के असल हमराही होते हैं।

WIN चैनल उसी सुबह की तैयारी है। और इमरान रसूल— उस तैयारी का एक ईमानदार, संजीदा और दूरदर्शी नाम।


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