रिपोर्ट: सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
सना (एजेंसियाँ/विशेष संवाददाता):
यमन की राजधानी सना शनिवार को मातम का शहर बन गई। इज़राइल ने बीती रात भीषण एयर स्ट्राइक की, जिसमें हूथी प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत हो गई। उनके साथ कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भी शहीद हो गए।
🔴 वर्कशॉप बनी मातमगाह
हूथी सरकार के अधिकारी एक वर्कशॉप में पिछले एक साल के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान इज़राइली लड़ाकू विमानों ने इमारत को निशाना बनाया। चंद सेकंड में पूरी इमारत मलबे का ढेर बन गई।
👉 सूत्रों के मुताबिक़, रक्षा मंत्री मोहम्मद अल-अती और सेना प्रमुख मोहम्मद अब्द अल-करीम अल-घमारी भी इस हमले में शहीद हो सकते हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
⚔️ बदले का वार
28 अगस्त को हूथियों ने इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन दागे थे। इसी का बदला लेने के लिए इज़राइल ने सना पर हमला किया।
- निशाने पर: राष्ट्रपति भवन, सैन्य ठिकाने और प्रशासनिक इमारतें।
- इज़राइल का दावा: हूथी आतंकियों पर सटीक प्रहार।
- हकीकत: मासूम नागरिकों की लाशें और मातम से गूंजता यमन।
🏥 सना की चीखें
हमले के बाद सना की गलियों में तबाही का मंजर था।
- 90 से अधिक नागरिक घायल
- 10 कमांडर और लड़ाके मारे गए
- अस्पतालों में जगह कम पड़ी, एंबुलेंस लगातार लाशें ला रही थीं।
📌 “पूरी इमारत पलक झपकते ही ढह गई। धुएं और आग में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। हर तरफ़ चीखें थीं।” — एक चश्मदीद
📦 बॉक्स न्यूज़
- हूथी प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी शहीद
- रक्षामंत्री और सेना प्रमुख की मौत की आशंका
- राष्ट्रपति भवन और सैन्य ठिकाने तबाह
- 90 से ज़्यादा घायल, सैकड़ों बेघर
- यमन में ग़ुस्से और मातम की लहर
🌍 दुनिया की खामोशी
यमनियों का सवाल है — क्या इंसानियत मर चुकी है?
संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी ताक़तें बयान देकर चुप हैं। लेकिन क्या बयान मातम मनाते परिवारों को सुकून देंगे?
✊ मज़लूमों की आहें
इतिहास गवाह है कि हर ज़ालिम का अंत होता है। रहावी और उनके साथियों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। यमन की धरती पर गिरा यह खून, इज़राइल के पतन की दास्तान लिखेगा।
“जालिम इज़राइल का ज़ुल्म जारी है, लेकिन मज़लूमों की दुआएँ और शहादत की खुशबू उसे एक दिन ज़रूर ध्वस्त कर देंगी।”