🗞️ तहलका टुडे | एक्सक्लूसिव न्यूज़
लखनऊ, 1 मई।देश में चल रही जनगणना को लेकर मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव और भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथारिटी आफताबे शरीयत मौलाना डॉ सैय्यद कल्बे जवाद नक़वी ने अहम बयान जारी किया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और मातृभाषा के कॉलम में पूरी जिम्मेदारी के साथ “उर्दू” दर्ज करें।
मौलाना ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं बल्कि भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखने का एक अहम जरिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उर्दू बोलने वाले लोग अपनी मातृभाषा के पंजीकरण में लापरवाही करेंगे, तो भविष्य में इसके नकारात्मक प्रभाव शैक्षिक अधिकारों, सरकारी प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक अस्तित्व पर पड़ सकते हैं।
उन्होंने लोगों से कहा कि जनगणना फॉर्म भरने के बाद उसे ध्यान से जांचें और यदि किसी कारणवश “उर्दू” दर्ज नहीं हो पाती है, तो उसे सुधारने के लिए पुनः आवेदन जरूर करें। मौलाना ने बताया कि जनगणना फॉर्म ऑनलाइन भी उपलब्ध है, जिसे लोग स्वयं भर सकते हैं और उसकी एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखें।
साथ ही उन्होंने सामाजिक व धार्मिक संगठनों, खासकर इमाम-ए-जुमा और इमाम-ए-जमाअत से अपील की कि वे अपने खुत्बों और मजलिसों के जरिए इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाएं, ताकि समुदाय की सही भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
मौलाना ने कहा कि भाषा का सही पंजीकरण ही पहचान, व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत की असली सुरक्षा है।




