वॉशिंगटन/तेहरान/नई दिल्ली | तहलका टुडे डेस्क (एजेंसी इनपुट के साथ)
अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। United States Supreme Court ने राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को 6-3 के बहुमत से रद्द कर दिया। यह वही टैरिफ ढांचा था, जिसके जरिए ट्रंप प्रशासन ईरान समेत कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा था।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला न केवल ट्रंप की आर्थिक नीति को झटका है, बल्कि अमेरिकी संविधान में कर लगाने की शक्ति को लेकर एक ऐतिहासिक पुनर्पुष्टि भी है — कि यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
क्या था पूरा मामला?
ट्रंप प्रशासन ने 1977 के कानून — International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) — का हवाला देकर “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित करते हुए अधिकांश देशों पर “पारस्परिक टैरिफ” लगाए थे।
- व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताया गया
- कनाडा, चीन, मैक्सिको पर विशेष शुल्क
- व्यापक आयात कर ढांचा तैयार
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA में टैरिफ लगाने की स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि “कर लगाने की शक्ति संविधान के अनुसार कांग्रेस को सौंपी गई है।”
क्या ईरान पर दबाव की रणनीति कमजोर हुई?
ट्रंप प्रशासन का घोषित उद्देश्य व्यापार असंतुलन सुधारना था, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह ढांचा उन देशों पर भी दबाव बनाने का उपकरण था, जिनसे अमेरिका के राजनीतिक मतभेद रहे हैं — जिनमें ईरान प्रमुख है।
हालांकि यह फैसला सीधे किसी सैन्य या कूटनीतिक कदम से जुड़ा नहीं है, लेकिन:
- व्यापक टैरिफ ढांचा ध्वस्त होने से
- आपातकालीन शक्तियों के आर्थिक उपयोग पर रोक लगने से
- कांग्रेस की भूमिका मजबूत होने से
ईरान पर एकतरफा आर्थिक दबाव की गुंजाइश सीमित हो गई है।
ध्यान रहे, ईरान पर अमेरिका के अलग-अलग प्रतिबंध तंत्र पहले से लागू हैं और यह फैसला उन्हें स्वतः समाप्त नहीं करता। यह निर्णय विशेष रूप से IEEPA के तहत लगाए गए व्यापक आयात टैरिफ से संबंधित है।
ईरान को संभावित लाभ
- वैश्विक व्यापार माहौल में नरमी
व्यापक अमेरिकी टैरिफ हटने से वैश्विक बाजारों में स्थिरता आ सकती है, जिससे ईरान के साथ व्यापार करने वाले तीसरे देशों को राहत मिल सकती है। - तेल और ऊर्जा बाजार में संतुलन
यदि वैश्विक व्यापार तनाव घटता है, तो ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आ सकती है — जिससे ईरान जैसे ऊर्जा निर्यातक देश को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। - राजनीतिक संदेश
यह फैसला बताता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों पर संस्थागत संतुलन मौजूद है — जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक संकेत देता है।
भारत को क्या फायदा हो सकता है?
भारत के लिए यह फैसला कई स्तरों पर अहम है:
1️⃣ निर्यातकों को राहत
यदि व्यापक अमेरिकी टैरिफ नीति कमजोर होती है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा आसान हो सकती है।
2️⃣ तेल आयात रणनीति
वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने पर भारत को तेल खरीद में बेहतर मोलभाव की स्थिति मिल सकती है।
3️⃣ व्यापार वार्ताओं में संतुलन
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में टैरिफ का दबाव एक अहम मुद्दा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वार्ता का स्वरूप बदल सकता है।
4️⃣ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
यदि व्यापार युद्ध का खतरा कम होता है, तो सप्लाई चेन व्यवधान घट सकते हैं — जिससे भारतीय उद्योगों को लाभ मिल सकता है।
133 अरब डॉलर का आर्थिक प्रश्न
संघीय आंकड़ों के अनुसार, इन टैरिफ के जरिए अमेरिकी ट्रेजरी ने 133 अरब डॉलर से अधिक की वसूली की थी।
कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या कंपनियों को रिफंड मिलेगा, लेकिन माना कि प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
राजनीतिक और संवैधानिक असर
फैसले में “मेजर क्वेश्चन डॉक्ट्रिन” का उल्लेख किया गया, जिसके अनुसार बड़े आर्थिक महत्व वाले कदमों के लिए कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति आवश्यक होती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला:
- कार्यपालिका की शक्ति सीमित करता है
- कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करता है
- 2026 की अमेरिकी राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है
सत्यता और स्रोत
यह रिपोर्ट एजेंसी इनपुट (AP रिपोर्ट), अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय दस्तावेजों और संघीय आर्थिक आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।
यह निर्णय विशेष रूप से IEEPA के तहत लगाए गए वैश्विक टैरिफ से संबंधित है और अन्य अलग प्रतिबंध तंत्र पर स्वतः लागू नहीं होता।
ट्रंप की वैश्विक टैरिफ रणनीति को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक आधार पर रोक दिया है।
यह फैसला केवल अमेरिकी आंतरिक राजनीति का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और भारत जैसे उभरते देशों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि:
- क्या कांग्रेस नया कानून लाती है
- क्या प्रशासन वैकल्पिक कानूनी रास्ता अपनाता है
- और क्या वैश्विक व्यापार तनाव वास्तव में कम होता है
तहलका टुडे इस मामले पर निरंतर नज़र बनाए हुए है।





