तहलका टुडे टीम/सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
लखनऊ, 14 फरवरी।यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आज इंदिरा भवन में प्रस्तावित बैठक को लेकर राजधानी में हलचल तेज है। बैठक अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन उससे पहले ही बोर्ड के भीतर नाराज़गी और बाहर विरोध के स्वर उभर आए हैं। सूत्रों के अनुसार, कई सदस्य एजेंडे और प्रक्रिया को लेकर असंतुष्ट हैं तथा बैठक में हंगामे के आसार जताए जा रहे हैं। भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथारिटी आफताबे शरीयत मौलाना डॉ कल्बे जवाद नकवी साहब और उनके खास वक्फ बोर्ड के सदस्य मौलाना रज़ा हुसैन साहब यूपी शिया वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और कार्यकार्दगी पर जांच की मांग कर चुके है,वही आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड और हैदरी टास्क फोर्स भी वक्फ बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके है और मुख्यमंत्री कार्यालय पर प्रदर्शन का ऐलान और सीबीआई और एसआईटी जांच के साथ कर चुके है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब बोर्ड पर कथित फर्जी सिफारिशी लेटर, मुतवल्ली नियुक्तियों में अनियमितता, डीएम सत्यापन प्रक्रिया की अनदेखी और दोबारा उन पत्रों के वेरिफिकेशन न कराने और बिना विधिवत मीटिंग कई औकाफ़ डिलीट किए जाने जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा पहले से ही चल रही है।
फर्जी सिफारिश लेटर और मुतवल्ली नियुक्ति पर विवाद
सूत्रों का दावा है कि मौलाना डॉ. Kalbe Jawad Naqvi के नाम से कथित फर्जी लेटर पैड का हवाला दे कर कुछ व्यक्तियों को मुतवल्ली बनाए जाने की तैयारी की गई। आरोप यह भी है कि जिन लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है, उनमें विवादित पृष्ठभूमि वाले और कथित रूप से भू-माफियाओं से जुड़े तत्व शामिल हो सकते हैं।जबकि मौलाना कल्बे जवाद नकवी द्वारा किसी तरह की किसी के लिए न पत्र जारी किया गया,न ही सिफारिश की गई,बल्कि उनका साफ साफ कहना है जो सही हो उसको मुतवल्ली बनाया जाए।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह मामला बोर्ड की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।
सत्यापन प्रक्रिया और नियम-कानून पर प्रश्न
बताया जा रहा है कि:
- डीएम स्तर के सत्यापन पत्रों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
- कथित सिफारिश और सत्यापन लेटर का स्वतंत्र वैरीफिकेशन नहीं कराया गया।
- वक्फ एक्ट और शासनादेशों के निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण पालन नहीं हुआ।
यदि ये आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।
रिटायर्ड और चार्जशीटेड कर्मचारियों की भूमिका भी घेरे में
मामले को और संवेदनशील बनाता है यह आरोप कि बोर्ड के कुछ चार्जशीटेड और आपराधिक छवि वाले रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, उनका कार्यकाल शासनादेशों को ताक पर रखकर बढ़ाया गया।
यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि वक्फ एक्ट और संबंधित शासनादेशों की भी सीधी अवहेलना मानी जाएगी। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि प्रशासनिक स्तर पर इन निर्णयों की स्वीकृति कैसे दी गई और क्या इसके लिए उचित अनुमति ली गई थी।
बिना मीटिंग औकाफ़ डिलीट करने का आरोप
इसके अतिरिक्त, कई औकाफ़ (वक्फ संपत्तियों) को नियमित बोर्ड मीटिंग और अनुमोदन के बिना डिलीट किए जाने की भी चर्चा है। जबकि मामले वक्फ ट्रिब्यूनल में चल रहे थे,वक्फ संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक अमानत मानी जाती हैं, ऐसे में इनके रिकॉर्ड में बदलाव अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी विधिवत प्रक्रिया अनिवार्य मानी जाती है।
कार्यकाल समाप्ति वर्ष में बैठक, कोरम पर सवाल
आज 14 फरवरी को छुट्टी के दिन बुलाई गई यह बैठक बोर्ड के कार्यकाल समाप्ति वर्ष में आयोजित की जा रही है। सूत्रों के अनुसार:
- कोरम पूरा न होने की आशंका है।
- कई सदस्य एजेंडा तय करने की प्रक्रिया से असंतुष्ट हैं।
- बैठक में तीखी बहस और हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
पहले भी उठती रही है आवाज
मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी ने पूर्व में कई बार जुमे की नमाज़ और सार्वजनिक मंचों से बोर्ड की कथित बदउन्वनियों पर सवाल उठाए हैं। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी पारदर्शिता और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच मामला और संवेदनशील
प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “जीरो टॉलरेंस” नीति के बीच यदि वक्फ संपत्तियों और नियुक्तियों में अनियमितता सिद्ध होती है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बनेगा। सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और शासन स्तर तक पहुंच चुकी है।
आज की बैठक पर टिकी निगाहें
फिलहाल, इंदिरा भवन में प्रस्तावित बैठक से यह स्पष्ट होगा कि बोर्ड विवादों पर क्या रुख अपनाता है—क्या विवादित प्रस्तावों पर रोक लगेगी, क्या जांच की घोषणा होगी या क्या आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आएंगे।
वक्फ बोर्ड से जुड़ा यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक विश्वास से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। ऐसे में पारदर्शिता, वैधता और जवाबदेही ही वह आधार होंगे, जिन पर आज की बैठक और उसके निर्णयों का आकलन किया जाएगा।





