CIA–मोसाद की साज़िश बेनक़ाब: तहलका टुडे की रिपोर्ट से अमेरिका-इज़राइल में हड़कंप, प्रियंका के ट्वीट पर खेली गई दोहरी चाल

THlkaEDITR
3 Min Read

तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क 

नई दिल्ली। जब तहलका टुडे ने भारत में CIA और मोसाद के गहरे नेटवर्क और सत्ताई खेल का पर्दाफाश किया, तो अमेरिका और इज़राइल में हलचल मच गई। रिपोर्ट ने साफ़ किया कि किस तरह ये विदेशी एजेंसियां, बीजेपी की मोदी सरकार को गिराने और देश को आर्थिक–राजनीतिक गुलामी की तरफ धकेलने के लिए सुनियोजित प्लान चला रही हैं।

भारत पर अदृश्य वार: CIA–मोसाद की गहरी जड़ें और सत्ता के खेल का खुलासा

प्रियंका गांधी को फ्रंट पर लाकर किया प्रोपेगेंडा वार

https://x.com/priyankagandhi/status/1955126291574952364?t=iHiiRIHxMUB99lFRUoxfaA&s=19

रिपोर्ट सामने आने के चंद घंटों बाद, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने गाज़ा में इज़राइली हमलों को “जनसंहार” बताते हुए ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने 60,000 मौतों और 18,430 बच्चों के मारे जाने का आंकड़ा पेश किया। यह बयान विदेशी नैरेटिव के ठीक मुताबिक था, जिसने सोशल मीडिया पर भूचाल ला दिया।

https://x.com/ReuvenAzar/status/1955158653465661538?t=5Ho8QzQ6V_ysMR0OR70w9Q&s=19

इज़राइली राजदूत का पब्लिक ‘विरोध’ – असल में स्क्रिप्ट का हिस्सा?

भारत में इज़राइल के राजदूत रूवेन अज़र ने प्रियंका के आंकड़ों को “हमास का प्रोपेगेंडा” बताया और सलाह दी कि भारत इन्हें न माने। पहली नज़र में यह प्रियंका के खिलाफ बयान लगता है, लेकिन खुफिया सूत्र मानते हैं कि यह महज़ एक पब्लिक स्टंट था—ताकि असली साज़िश से ध्यान भटकाया जा सके और भारत में वैचारिक टकराव और तेज़ हो।

अमेरिका–इज़राइल का लक्ष्य: मोदी सरकार को अस्थिर करना

सूत्रों का दावा है कि CIA और मोसाद, मोदी और योगी सरकार को घेरने के लिए सोशल मीडिया ट्रेंड्स, धार्मिक विवाद, आर्थिक दबाव और राजनीतिक घटनाओं को एक ही पटकथा के तहत अंजाम दे रहे हैं। यह वही पॉलिसी है जो वे पहले ईरान, सीरिया और कई अफ्रीकी देशों में लागू कर चुके हैं।

RSS और मीडिया की चुप्पी – सवालों के घेरे में

जो मीडिया और संगठन पहले हर विवाद पर खुलकर बोलते थे, अब इन विदेशी दख़लों पर चुप हैं। जानकार मानते हैं कि यह चुप्पी या तो ‘डील’ का नतीजा है या फिर विदेशी दबाव का।

भारत के सामने निर्णायक चुनौती

यह दौर सिर्फ़ विपक्षी राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्र की संप्रभुता के लिए लड़ाई का है। सवाल यह है कि क्या भारत अपने खुफिया ढांचे और जनता की एकजुटता से इस साज़िश को नाकाम कर पाएगा, या फिर यह भी विदेशी एजेंडों का मोहरा बनकर रह जाएगा।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *