तहलका टुडे टीम
भारत की धरती ने एक बार फिर अपने वीर सपूत पर गर्व किया है। स्क्वॉड्रन लीडर रिज़वान मालिक, भारतीय वायु सेना के उस जांबाज़ पायलट का नाम आज हर देशवासी की ज़ुबान पर है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में तिरंगा लहराते हुए दुश्मन के इरादों को चकनाचूर कर दिया।
7 से 10 मई 2025 के बीच चले इस निर्णायक अभियान में, पाकिस्तान के आतंकी अड्डों और सैन्य ठिकानों पर भारत ने बिजली की तरह वार किया। रिज़वान मालिक और उनके साथी पायलटों ने सिर्फ़ हमला नहीं किया, बल्कि पाकिस्तान के पाँच लड़ाकू विमानों और एक बड़े सैन्य विमान को हवा में ही तबाह कर दिया। यह सिर्फ़ जीत नहीं थी, बल्कि दुश्मन की हवा से ताक़त छीन लेने जैसा था।
वीर चक्र से सम्मानित
उनकी इसी शौर्यगाथा के लिए भारत सरकार ने स्क्वॉड्रन लीडर रिज़वान मालिक को देश के तीसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता सम्मान “वीर चक्र” से नवाज़ा है। उनके साथ IAF के 8 और जांबाज़ पायलट भी इस सम्मान से अलंकृत हुए।
दिलेर उड़ान, अडिग हौसला
रिज़वान मालिक ने न सिर्फ़ हवा में अपने अद्भुत युद्धकौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि जिस साहस से उन्होंने दुश्मन के इलाके में घुसकर वार किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गया। ऑपरेशन सिंदूर में उनका योगदान यह साबित करता है कि जब देश की इज़्ज़त और सुरक्षा की बात आती है, तो भारतीय वायु सेना का हर पायलट मौत से भी खेल सकता है।
भारत का गर्व, दुश्मन का डर
आज रिज़वान मालिक का नाम भारत के उन वीरों की सूची में दर्ज हो चुका है, जो हर सांस में सिर्फ़ मातृभूमि की सेवा का सपना देखते हैं। उनकी यह जीत पाकिस्तान की वायुसेना को पाँच साल पीछे धकेल चुकी है और यह संदेश दे चुकी है – भारत को कमज़ोर समझने की गलती कोई न करे।
यह कहानी सिर्फ़ एक पायलट की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो हर भारतीय के दिल में बसता है—“वतन के लिए जीना और वतन के लिए मर जाना।”