तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
तेहरान, 27 नवम्बर —
जब दुनिया की सबसे ताक़तवर कहलाने वाली ताक़तें झूठ, फरेब और मीडिया की चालों से हक़ीक़त को दबाने में लगी थीं, उसी वक़्त इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई की आवाज़ ने वह काम किया, जिसे सुनकर न सिर्फ़ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया सन्न रह गई।
🔥 झूठ का घमंड टूट गया — सच की आवाज़ जीत गई
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दावा फैलाया कि
ईरान ने सऊदी क्राउन प्रिंस के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति को संदेश भेजा।
लेकिन आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस दावे को इतने ठोस, इतनी गरिमा और इतनी बहादुरी से खारिज किया कि यह बयान इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।
उनके शब्द गूँजे—
“यह सरासर झूठ है — ऐसा झूठ जिसे सुनकर खुद झूठ शर्म से डूब जाए।”
“ईरान ने कभी इस युद्ध-उन्मादी अमेरिकी सरकार को कोई संदेश नहीं भेजा।”
यह सिर्फ़ बयान नहीं,
दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति के सामने सच्चाई का क़ुरआनी सज़्दा था।
🌍 विश्व शांति का असली पैग़ाम
उन्होंने कहा—
“अमेरिका ज़ायोनी शासन के अपराधों में साझेदार है।
ऐसी सरकार बात करने के लायक भी नहीं।”
आज जब कुछ राष्ट्र अपने हथियारों पर गर्व करते हैं,
ईरान सच और इंसानियत पर गर्व करता है— यही असली ताक़त है।
💔 ग़ज़ा का दर्द—नेता की आवाज़ में दुनिया की पुकार
उन्होंने दिल को चीर देने वाले शब्दों में कहा—
“ग़ज़ा में हो रहा नरसंहार इंसानियत के लिए शर्म का सबब है।
आज पूरी दुनिया इन अपराधियों से नफरत कर रही है।”
उन्होंने ज़ायोनी प्रधानमंत्री को
“दुनिया का सबसे नापसंद और नफ़रत किया जाने वाला व्यक्ति”
करार दिया।
⚔️ 12 दिनों की जंग—अहंकार की राख
दुनिया को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा—
“20 वर्षों की तैयारी के बावजूद अमेरिका और इस्राईल 12 दिनों की जंग में ईरानी एकता के सामने ढह गए।”
यह जीत मिसाइलों की नहीं — ईमान, हौसले और मज़लूमों की दुआओं की जीत थी।
🇮🇷 कौम के नाम आख़िरी और दिल छूने वाली अपील
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने भावुक स्वर में कहा—
“अपने मुल्क की हिफ़ाज़त के लिए एकजुट रहें।
सरकार का साथ दें — यही असली जिहाद और वतन का हक़ है।”
✊ दुनिया आज ईरान से सीख रही है
जब झूठ और दग़ाबाज़ी शासक बन बैठे हों,
जब मीडिया सच का गला घोंट दे,
जब बड़ी ताक़तें मज़लूमों का खून पी जाएँ —
ऐसे समय में आयतुल्लाह ख़ामेनेई का यह मुंह–तोड़ जवाब
मज़लूमों की उम्मीद और ज़ालिमों की बर्बादी की दस्तक बनकर गूंजा है।
💥 यह आवाज़ हर मैदान-ए-जंग से बुलंद है:
“सच की ताक़त हथियारों से बड़ी होती है —
और मज़लूम की दुआ से बढ़कर कोई मिसाइल नहीं।”




