🔍 तहलका टुडे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन/सैयद रिज़वान मुस्तफा
देश भर में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर शुरू हुई सबसे बड़ी डिजिटल कवायद—‘उम्मीद पोर्टल’—अब राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गई है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 9 दिसंबर को जारी प्रेस नोट ने पहली बार साफ शब्दों में स्वीकार किया कि—
“वक्फ बोर्डों ने चार महीनों तक लगभग कोई काम नहीं किया।
फिर आखिरी दिनों में हड़बड़ी में लाखों रिकॉर्ड अपलोड किए।”**
यह बयान अपने आपमें वक्फ बोर्डों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इसी बीच एक्टिविस्ट संगठन Save Waqf India सामने आया है और उसने कहा है कि—
**“अगर सरकार सच में वक्फ जमीनों को वक्फखोरों और भू-माफियाओं से बचाना चाहती है,
तो उम्मीद पोर्टल की डेडलाइन कम-से-कम छह महीने और बढ़ाई जाए।”**
📌 मंत्रालय का प्रेस नोट — ‘लचर कार्यशैली’ पर सबसे बड़ा सरकारी आरोप
मंत्रालय ने खुद बताया कि:
- 7 संभागीय समीक्षा व प्रशिक्षण बैठकें हुईं
- 30 राज्यों/UTs व 32 बोर्डों को करीब 10 करोड़ की फंडिंग दी गई
- मास्टर ट्रेनर बनाए गए
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रशिक्षण
- हेल्पलाइन, टेक्निकल सपोर्ट 24×7 उपलब्ध
- बोर्डों को बार-बार निर्देश जारी
लेकिन इसके बावजूद जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर —
चार महीने तक देशभर के वक्फ बोर्ड लगभग पूरी तरह निष्क्रिय रहे।
यह है सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अपलोड का सच:
| माह (2025) | अपलोड की गई वक्फ संपत्तियाँ |
|---|---|
| जून | 11 |
| जुलाई | 50 |
| अगस्त | 822 |
| सितंबर | 4,327 |
| अक्टूबर | 25,827 |
| नवंबर | 2,42,463 |
| दिसंबर (6 तक) | 2,43,582 |
| कुल | 5,17,082 |
यह स्पष्ट करता है कि—
“काम समय पर नहीं, डर पर हुआ।”
डेडलाइन नज़दीक आई तो बोर्ड एकाएक ‘सक्रिय’ हो गए।
यानी समस्या तकनीक की नहीं, इरादों की थी।
📌 WAMSI पर मंत्रालय का ऐतिहासिक खुलासा: ‘अविश्वसनीय, त्रुटिपूर्ण, खत्म’
प्रेस नोट ने स्पष्ट कर दिया कि पूर्व सिस्टम WAMSI —
- हजारों गलत रिकॉर्डों से भरा था
- डुप्लिकेट कोड
- शून्य-क्षेत्र वाली झूठी संपत्तियाँ
- साक्ष्यहीन भूमि क्षेत्र
- गड़बड़ी का स्तर इतना कि खुद राज्य बोर्डों ने शिकायतें दर्ज कीं
इसलिए सरकार ने WAMSI को 8 मई 2025 को आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया।
मंत्रालय ने मीडिया के उस दावे को खारिज कर दिया कि “सिर्फ 27% संपत्तियाँ ही अपलोड हुई हैं।”
क्योंकि वह दावा WAMSI के मौत हो चुके डेटा पर आधारित है।
क्योंकि वह दावा WAMSI के मौत हो चुके डेटा पर आधारित है।
📌 उम्मीद पोर्टल ने किया कमाल — लेकिन बोर्डों की गलती से इसके लाभ सीमित
150 घंटे में 2.5 लाख अपलोड
24×7 टेक्निकल सपोर्ट
डॉक्यूमेंट-बेस्ड सत्यापन
आधुनिक वर्कफ़्लो
लेकिन सवाल वही —
“जब पोर्टल इतना सक्षम था, तो बोर्ड चार महीने क्यों सोए रहे?”
📌 Save Waqf India की एंट्री — ‘मुतवल्ली दोषी नहीं, बोर्डों की देरी जिम्मेदार’
संगठन ने कहा है कि—
- शुरुआती महीनों में बोर्डों की निष्क्रियता से छोटे वक्फ मुतवल्ली सबसे अधिक प्रभावित हुए
- हजारों लोग रिकॉर्ड अपलोड नहीं कर पाए
- यह देरी बोर्डों की थी, सजा क्यों मुतवल्लियों को मिले?
- करोड़ों की संपत्तियाँ ‘नॉन-अपलोडेड’ होने के खतरे में हैं
- कई जगह इंटरनेट, स्टाफ और ट्रेनिंग की भारी कमी रही
इसलिए Save Waqf India ने केंद्र से मांग करते हुए स्पष्ट कहा—
👉 “उम्मीद पोर्टल की विंडो 6 महीने के लिए तुरंत खोली जाए।”
📌 बड़ा संकट: ट्रिब्यूनल खाली — न्याय कैसे मिलेगा?
मंत्रालय ने कहा—
“जिन मुतवल्लियों ने अपलोड नहीं किया, वे ट्रिब्यूनल जाएँ।”
लेकिन Save Waqf India ने जो बात उठाई, वह बेहद गंभीर है:
“UP समेत कई राज्यों में वक्फ ट्रिब्यूनल की सीटें ही खाली पड़ी हैं।”
तहलका टुडे ने भी जमीनी स्तर पर पाया है कि—
- उत्तर प्रदेश में कई वर्षों से सदस्य स्थिति खाली
- बिहार में भी पेंडिंग मामलों का पहाड़
- मध्य प्रदेश और राजस्थान में ट्रिब्यूनल अधूरे
- कई राज्यों में स्टाफ तक नहीं
फिर मंत्रालय के निर्देश पर सवाल —
“ट्रिब्यूनल ही नहीं हैं, न्याय कौन देगा?”
📌 Save Waqf India की तीन राष्ट्रीय मांगें
1️⃣ उम्मीद पोर्टल की डेडलाइन 6 महीने बढ़ाई जाए
ताकि सही रिकॉर्ड और असली मालिक सामने आ सकें।
2️⃣ वक्फ ट्रिब्यूनल की सभी खाली सीटें तत्काल भरी जाएँ
बोर्डों की गड़बड़ियों से मुतवल्लियों को बचाने के लिए न्यायिक ढांचा मजबूत करना जरूरी है।
3️⃣ WAMSI के गलत डेटा की स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
ताकि झूठे आंकड़ों पर भ्रम फैलाने वालों को बेनक़ाब किया जा सके।
📌 तहलका टुडे का विश्लेषण — असली सवाल इन तीन बिंदुओं में छिपा है
✔ सरकारी ढांचा मजबूत था
✔ तकनीक सक्षम थी
✔ प्रशिक्षण और फंड उपलब्ध थे
✘ फिर भी चार महीने तक बोर्ड निष्क्रिय क्यों रहे?**
**✔ WAMSI वर्षों खराब चलता रहा
✘ अब उम्मीद पोर्टल को सिर्फ छह महीने देकर क्यों बंद कर दिया गया?**
✔ मंत्रालय कहता है ट्रिब्यूनल जाएँ
✘ लेकिन ट्रिब्यूनल खाली क्यों हैं?**
इन सवालों का जवाब वक्फ समुदाय का भविष्य तय करेगा।
“यह सिर्फ पोर्टल की डेडलाइन नहीं, अरबों की औक़ाफ़ संपत्तियों की सुरक्षा का सवाल है”
Save Waqf India की बात सिर्फ मांग नहीं —
यह चेतावनी है।
अगर समय नहीं बढ़ाया गया तो —
- हजारों वक्फ संपत्तियाँ अनलिस्टेड रह जाएँगी
- कब्जेदारों और माफियाओं को फायदा होगा
- छोटे मुतवल्लियों पर कानूनी बोझ बढ़ेगा
- बोर्डों की गड़बड़ी ज़मीनी स्तर पर नए विवाद खड़े करेगी
- ट्रिब्यूनल के अभाव में न्याय रुका रहेगा
तहलका टुडे इस मुद्दे पर नज़र बनाए रखेगा और
हर नई जानकारी तुरंत आपके सामने रखेगा।




