तहलका टुडे टीम
सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh का एक डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया गया वीडियो इजराइल प्रोपोगेंडा अकाउंट्स द्वारा वायरल किया गया, जिसमें झूठा दावा किया गया कि उन्होंने ईरान पर इज़राइल के हमले का समर्थन किया है। वीडियो के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई।
हालांकि, कुछ ही समय बाद Press Information Bureau की फैक्ट चेक इकाई (#PIBFactCheck) ने स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और वायरल वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। मूल, बिना संपादित वीडियो जारी कर सच्चाई सामने रखी गई, जिससे दुष्प्रचार की साज़िश का पर्दाफाश हो गया।
लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब और राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सिर्फ एक राष्ट्रीय नेता ही नहीं, बल्कि Lucknow की रूह और गंगा-जमुनी तहज़ीब से गहराई से जुड़े व्यक्तित्व हैं। लखनऊ अपनी नफ़ासत, अदब, आपसी भाईचारे और शिया-सुन्नी एकता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
राजनाथ सिंह हमेशा से एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द के पक्षधर रहे हैं। लखनऊ और ईरान के बीच जो ऐतिहासिक और धार्मिक रिश्ता है—खास तौर पर अज़ादारी, इमामबाड़ों और इल्मी-रूहानी ताल्लुकात के जरिए—उसकी अहमियत को वह भली-भांति समझते हैं।
मशहद से दुआएं: मोहब्बत और रूहानी रिश्ते की मिसाल
पिछले वर्ष जब उनके पोते की तबीयत खराब हुई, तो ईरान के पवित्र शहर मशहद स्थित Imam Reza Shrine से शिफ़ा की जाली से दुआएं की गई और तबर्रुक भेजे गए थे। यह तबर्रुक ईरान कल्चर हाउस नई दिल्ली के माध्यम से उन तक पहुंचाया गया था।
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक प्रसंग नहीं थी, बल्कि भारत और ईरान के बीच मौजूद आवामी मोहब्बत, आध्यात्मिक जुड़ाव और सम्मान का प्रतीक भी बनी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि दोनों समाजों के बीच रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि दिली और रूहानी भी हैं।
हैदरगढ़ से लखनऊ तक: जनविश्वास की निरंतरता
राजनाथ सिंह शिया बाहुल्य क्षेत्र हैदरगढ़ से दो बार विधायक रहे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और वर्तमान में लखनऊ से सांसद हैं। जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और भरोसा उनकी राजनीतिक यात्रा का प्रमाण है।
उनका संवाद भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथॉरिटी आफताबे शरीयत Maulana Kalbe Jawad Naqvi, आयतुल्लाह हमीदुल हसन साहब और मौलाना यासूब अब्बास जैसे प्रमुख उलेमा से भी है। यह संवाद आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता की परंपरा को मजबूत करता है।
दुष्प्रचार की साज़िश और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी
फर्जी वीडियो के वायरल होते ही भ्रम और आक्रोश का माहौल बनाया गया, लेकिन PIB फैक्ट चेक के हस्तक्षेप ने सच्चाई सामने ला दी। यह घटना एक बार फिर बताती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने की कोशिशें जारी हैं।
सोशल मीडिया के दौर में किसी भी वीडियो या बयान को बिना सत्यापन के साझा करना समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि किए बिना किसी भी संवेदनशील सामग्री को आगे न बढ़ाए।
इस पूरे प्रकरण ने दो बातें स्पष्ट कर दीं—पहली, भारत के खिलाफ दुष्प्रचार की साज़िशें समय-समय पर रची जाती हैं; और दूसरी, सच को दबाया नहीं जा सकता।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सार्वजनिक जीवन एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों पर आधारित रहा है। लखनऊ की तहज़ीब, भारत-ईरान के ऐतिहासिक रिश्ते और आपसी सम्मान की भावना किसी फर्जी वीडियो से कमजोर नहीं हो सकती।
सतर्क रहें, सत्यापित करें और गलत सूचना के प्रसार को रोकने में अपनी भूमिका निभाएं—यही आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।





