तहलका टुडे टीम
लखनऊ। विकासनगर की जली हुई बस्तियों से उठती राख आज भी उस भीषण त्रासदी की गवाही दे रही है, जिसने 1000 से अधिक गरीब परिवारों के आशियाने और उनके सपनों को एक पल में खाक कर दिया। हर तरफ बर्बादी, हर चेहरे पर दर्द… लेकिन इसी मंजर के बीच इंसानियत की एक ऐसी मिसाल भी सामने आई, जिसने टूटे दिलों को सहारा दिया।
हाजी वारिस अली शाह के पैतृक गांव रसूलपुर बाराबंकी के काज़मी एजुकेशनल एंड हेल्थकेयर सोसाइटी किंतूर के इमाम खुमैनी फाउंडेशन और लखनऊ की प्रतिष्ठित संस्था अवध वेल्फेयर सोसाइटी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इस आपदा में आगे बढ़कर पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया।
🕊️ मीनाब की मासूम याद में—दर्द से जुड़ी इंसानियत
इस राहत कार्य को एक खास भावनात्मक जुड़ाव के साथ अंजाम दिया गया। ईरान के मीनाब में शहीद हुई मासूम बच्चियों की दर्दनाक याद में, विकासनगर के पीड़ित—बच्चों, महिलाओं और पुरुषों—के लिए एक निःशुल्क मेडिकल कैम्प आयोजित किया गया।
यह पहल सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि— दर्द की कोई सरहद नहीं होती, और इंसानियत हर दर्द को अपना मानती है।
🏥 मेडिकल कैम्प: इलाज के साथ मिला सहारा
इस कैम्प में—
- सैकड़ों लोगों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
- जरूरतमंदों को फ्री दवाएं वितरित की गईं
- विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हर मरीज को व्यक्तिगत परामर्श दिया
- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी गई
यह कैम्प उन लोगों के लिए उम्मीद बना, जिन्होंने एक ही दिन में अपना सब कुछ खो दिया।
🌙 इंसानियत का पैगाम
काज़मी सोसाइटी के डॉ. रेहान काज़मी ने कहा—
“क़ुरआन का संदेश है कि जिसने एक इंसान की जान बचाई, उसने पूरी इंसानियत को बचाया। हम उसी संदेश को लेकर यहाँ आए हैं—मज़लूमों के साथ खड़े होने के लिए।”
उन्होंने बताया कि यह सेवा कार्य इमाम हुसैन (अ.स.) के नाम पर किया गया, ताकि कर्बला की सीख—त्याग और इंसानियत—हमेशा ज़िंदा रहे।
🗣️ अजमी रिज़वी का बयान: “यह सिर्फ राहत नहीं, इंसानियत का फर्ज़ है”
प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट के अजमी रिज़वी ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा—
“विकासनगर की यह त्रासदी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी की परीक्षा है। ऐसे वक्त में मदद करना एहसान नहीं, बल्कि इंसानियत का फर्ज़ है। जिस तरह संस्थाओं ने आगे आकर पीड़ितों का सहारा दिया है, वह काबिले-तारीफ ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल है।”
उन्होंने आगे कहा कि—
“हमें जरूरत है कि हम ऐसे पीड़ित परिवारों के साथ लगातार खड़े रहें, ताकि वे फिर से अपने जीवन को संवार सकें।”
🤝 जब कई हाथ बने सहारा
इस राहत अभियान में रईस हैदर, मोहम्मद उमर, मोहम्मद कलीम, कायम मेहदी, राजकुमार, औंन हैदर, तनव्वर हुसैन, मोहम्मद अशहूर सहित कई लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

चिकित्सकीय टीम में डॉ. शशीम मलिक, डॉ. मोहम्मद रूमान, डॉ. उजमा जबी, डॉ. बुशरा रिज़वी, आरती शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
🌟 राख में भी जिंदा है उम्मीद
स्थानीय लोगों की आँखों में दर्द है, लेकिन इस मदद ने उनके दिलों में एक नई उम्मीद जगा दी है। किसी ने सही कहा—
“जब सब कुछ जल गया, तब इंसानियत ने हमें थाम लिया।”
✍️ तहलका टुडे के लिए हसनैन मुस्तफा की विशेष रिपोर्ट






